फोरेंसिक विज्ञान व्यापक आकर्षण का विषय है । अपराध स्थल पर क्या होता है? डीएनए प्रोफाइलिंग कैसे काम करती है? यह वर्षो पहले हुए अपराधों को सुलझाने में कैसे मदद कर सकता है? फोरेंसिक विज्ञान में, एक आपराधिक मामला अक्सर बाल, रक्त के निशान, सिगरेट बट पर लार का थोड़ा सा हिस्सा, या टायर के चलने का निशान पर टिका हो सकता है। जटिल वैज्ञानिक निष्कर्षों पर सावधानीपूर्वक और निष्पक्ष रूप से विचार किया जाना चाहिए, और स्पष्टता, सरलता और सटीकता के साथ संप्रेषित किया जाना चाहिए। हाई प्रोफाइल मामलों ने हाल के वर्षों में इस रुचि को बढ़ा दिया है कि फोरेंसिक विज्ञान क्या है, अपराध की जांच में फोरेंसिक विज्ञान का उपयोग कैसे किया जाता है, जिसमें डीएनए प्रोफाइलिंग, टॉक्सिकोलॉजी, ट्रेस सबूत, डिजिटल फोरेंसिक और फिंगरप्रिंट शामिल हैं, अपराध के दृश्यों को कैसे प्रबंधित किया जाता है, फोरेंसिक वैज्ञानिक कैसे काम करते हैं, साक्ष्य को पुनर्प्राप्त करने के लिए उपयोग की जाने वाली विभिन्न तकनीकें, विश्लेषण के लिए उपलब्ध विधियों, यह इस बात पर भी विचार करता है कि कैसे फोरेंसिक विज्ञान आपराधिक न्याय प्रणाली और कानून की अदालत में जटिल वैज्ञानिक सबूतों को संप्रेषित करने की चुनौतियों की सेवा करता है ।
प्रत्येक अध्याय में फोरेंसिक विज्ञान के हिस्से के रूप में व्यावहारिक समझ, प्रभाव, क्षेत्र-परीक्षण, भौतिक साक्ष्य, विश्लेषणात्मक अनुभव, प्रबंधन और दस्तावेजीकरण में प्रशिक्षित किया गया है । अपने दृष्टिकोण में व्यावहारिक और यथार्थवादी समझ में सक्षम बनाती है कि वास्तविक दुनिया में फोरेंसिक विज्ञान कैसे काम करता है ।
‘‘न्यायालयिक विज्ञान एवं अपराध अन्वेषण हस्त पुस्तिका’’ आपराधिक घटनाओं में वैज्ञानिक विश्लेषणात्मक के तरीको और डिजिटल फोरेंसिक के बढ़ते क्षेत्र में नए विकास की तकनीकी के साथ अपराध स्थल प्रबंधन के सिद्धांतों और प्रक्रियाओं को समायोजित कर अद्यतन की गयी है जो निःसंदेह विभिन्न अपराधों के अन्वेषण, अभियोजन तथा प्रभावपूर्ण अभिशन्सा में एक उत्कृष्ट मार्गदर्शिका सिद्ध होगी ।
(प्रो0(डा0) आदर्श कुमार)
निदेशक, विधि विज्ञान प्रयोगशाला,
महानगर, लखनऊ ।